नीले अम्बर की हलकी शान्ति
सूखी, रेगिस्तान सी धरती
एक सूखा, भूरा पत्ता हलके से चर्र सी आवाज़ करता
अपनी झाड़ी से टूटा और नयी सैर को चला.
गहरी, सुनसान, सहमी सी शान्ति
और धरती की सूखी गहराई से वह पुकार
पूर्णता, तृप्ति की वह लालसा
रेगिस्तान की सूखी सी चीत्कार.
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