May 12, 2010

बेचैन


बेचैन
आज बेचैन

आगोश के अंजाम से बेचैन
हर अधूरे काम से बेचैन
याद आते हर लम्हे
की कटु जुबां से बेचैन

छलछलाते सपनों के सच से बेचैन
दोस्तों की आँखों के अलविदा से बेचैन .
बेवक्त चैन और रतनारे नैन से बेचैन
घूम रहा मनगढ़ंत सागर और गिरी में
लहरों की सौम्य गहरी सी शान्ति - पर मैं बेचैन.

शायद गहराइयों में डूबे चन्द्रमा की डोर से लटकूँगा.
इस सुदृश सूरज के धधकते तेज़ में .... मैं बेचैन

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